आप में से हर कई सारे लोग हमारे भारत के वीर शहीद भगत सिंह के बारे में हर कोई जानता है। उनकी पहचान उनकी निडरता और अपना स्वाभिमान है। सभी लोग जानते हैं कि भारत को आजादी देने में लाखों लोगों ने अपने प्राण त्याग दिए उन्हीं में से एक है वीर शहीद भगत सिंह।
वीर शहीद भगत सिंह का जन्म सन 1907 में 28 सितंबर लाहौर(पंजाब)के लायलपुर जिले के बावली गांव अंदर हुआ था। वीर शहीद भगत सिंह भारत के महान क्रांतिकारियों में से एक थे और मात्र 24 साल की उम्र में अपना प्राण न्योछावर करने वाले पहले स्वतंत्रता सेनानी थे।
सही बताए तो वीर भगत सिंह के बारे में जितनी लंबी कहानी कहे उतनी कम पड़ेगी क्योंकि वहां थे ही इतने जांबाज और निडर स्वतंत्र सेनानी जिसने अपने देश की आजादी के लिए प्राण त्याग दिए। वैसे वीर भगत सिंह का स्वतंत्र जीवन सब जानते हैं लेकिन भगत सिंह का जीवन परिचय के बारे में कोई ज्यादा बात नहीं करता।
भगत सिंह का प्रारंभिक जीवन परिचय
नाम (Name) | भगत सिंह |
जन्म दिनांक(Birth Date) | 28 सितंबर 1907 |
जन्म स्थान (Birth Place) | ग्राम बंगा, तहसील जरनवाला, जिला लायलपुर, पंजाब |
पिता का नाम (Father Name) | किशन सिंह |
माता का नाम (Mother Name) | विद्यावती कौर |
शिक्षा (Education) | डी.ए.वी. हाई स्कूल, लाहौर, नेशनल कॉलेज, लाहौर |
संगठन (Organization) | नौजवान भारत सभा, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन, कीर्ति किसान पार्टी, क्रांति दल |
राजनीतिक विचारधारा (Political ideology) | समाजवाद, राष्ट्रवाद |
मृत्यु (Death) | 23 मार्च 1931 |
मृत्यु का स्थान (Death Place) | लाहौर |
स्मारक (Memorial) | द नेशनल शहीद मेमोरियल, हुसैनवाला, पंजाब |
वीर भगत सिंह का जन्म स्थल पंजाब राज्य के नवांशहर जिले की खटकर कलां गावं के एक सीख परिवार में 28 सितंबर 1907 के अंदर उन्होंने जन्म लिया।
उनकी याद में अब इस जिले का नाम बदल कर शहीद भगत सिंह नगर रखा गया है। उनके पिता का नाम श्री किशन सिंह और माता श्री का नाम श्रीमती विद्यावती के तीसरे संतान थे। भगत सिंह का जीवन परिचय के बारे में बात करें तो सादगी भरा जीवन था और उनका परिवार स्वतंत्र संग्राम के अंदर पूरी तरीके से जुड़ा हुआ था।
सन 1916 के अंदर भगत सिंह अभ्यास के दौरान नामचीन नेता रासबिहारी और लाला लाजपत राय के संपर्क में आ गए थे और उस समय पंजाब राजनीतिक तौर पर काफी उत्तेजित था।। जब 13 अप्रैल 1919 के समय जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था तब वीर भगत सिंह महज 12 साल के थे और जलियांवाला बाग हत्याकांड के दौरान वीर भगत सिंह की मानसिकता पर गहरा असर डाल दिया था।
जलियांवाला बाग हत्याकांड के अगले ही दिन भगत सिंह जलियांवाला बाग गए और वहां पर जाकर अपने हाथों में मिट्टी इकट्ठा की और अपनी पूरी जिंदगी एक निशानी के तौर पर अपने पास रखा।
वीर भगत सिंह का क्रांतिकारी जीवन
जब गांधी जी ने सन 1921 के अंदर ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन का सहारा लिया तब भगत सिंह ने अपनी पढ़ाई को छोड़कर उस आंदोलन का हिस्सा बन गए और जब 1922 के अंदर गोरखपुर के अंदर चोरी चोरा में हुई हिंसा के अंतर्गत गांधी जी ने आंदोलन को बंद कर दिया उस बात को लेकर वीर भगत सिंह ने नाराजगी व्यक्त की थी। भगत सिंह का जीवन परिचय बहुत ही क्रांतिकारी और निडर पहले से ही रहा था।
वीर भगत सिंह ने जुलूस के अंदर भाग लेना शुरू कर दिया और क्रांतिकारी दलों के सदस्य भी बन गए। अपनी शिक्षा को पारंगत रूप से चालू रखने के लिए लाहौर के अंदर लाला लाजपत राय के द्वारा स्थापित राष्ट्रीय विद्यालय के अंदर प्रवेश लिया। यह विद्यालय क्रांतिकारी गतिविधियों का एक मुख्य केंद्र था और उस विद्यालय के अंदर भगत सिंह को सुखदेव और चरण वर्मा जैसे क्रांतिकारी के संपर्क में आए।
वीर भगत सिंह का शैक्षणिक जीवन
वीर भगत सिंह ने अपने जीवन की पांचवी कक्षा तक की पढ़ाई उनके गांव में की थी और उसके बाद उनके पिता श्री के द्वारा लाहौर के दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल के अंदर दाखिल करवाया गया।
भगत सिंह का जीवन परिचय के बात करें तो उन्होंने गांधी जी द्वारा संचालित और सहयोग आंदोलन में भाग लेने के लिए शिक्षा को छोड़ दिया था और वीर भगत सिंह ने खुलेआम अंग्रेजों को ललकारा था और सरकार द्वारा प्रायोजित पुस्तकों को जला कर गांधी जी की आज्ञा का पालन किया था। जैसे कि हमने बताया इस आंदोलन के लिए भगत सिंह ने नेशनल कॉलेज के अंदर एडमिशन प्राप्त करने के लिए स्कूल तक को भी छोड़ दिया था।
भगत सिंह के बचपन में हुए दो घटनाओं ने उन्हें मजबूत देश भक्ति दृष्टिकोण का आकार दिया जिसमें पहली थी 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड और सन 1921 में हुए नामकाना साहिब में निहत्थे अकाली प्रदर्शनकारियों की हत्या। वीर भगत सिंह का परिवार स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अहिंसक दृष्टिकोण से गांधीवादी विचारधारा में विश्वास रखते थे।
जब वीर भगत सिंह ने अपनी BA की पढ़ाई कर रहे थे तब उनके माता-पिता ने उनकी शादी कराने के बारे में सोचा लेकिन वीर भगत सिंह ने माता-पिता द्वारा रखे गए प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अपने देश की आजादी के पीछे छूट गए।
राष्ट्रीय आंदोलन और क्रांतिकारी विचारधारा में भगत सिंह का योगदान
शुरुआत के अंदर वीर भगत सिंह की गतिविधियां प्रारंभिक तौर पर ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध संक्षिप्त लेख लिखने, उनकी सरकार को जड़ से उखाड़ने में थी। सन 1926 के अंदर लाहौर में हुए बमबारी के किस्से में पुलिस के द्वारा है वीर भगत सिंह को गिरफ्तार कर दिया गया था और 5 महीनों के पश्चात ₹60000 का बांड पर मुक्त कर दिया गया।
नेता लाला लाजपत राय ने 30 अक्टूबर 1928 के अंदर उनके सभी दलों के जुलूस का नेतृत्व किया और साइमन कमीशन के विरुद्ध लाहौर के अंदर रेलवे स्टेशन की ओर मार्च किया था। पुलिस के द्वारा प्रदर्शन कर्ताओं को रोकने के लिए क्रूरता से लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा और इस प्रदर्शन के दौरान नेता लाला लाजपत राय को पुलिस के द्वारा किए गए लाठीचार्ज के दौरान काफी चोट आई और 17 नवंबर 1928 के अंदर ज्यादा चोट लगने के चलते उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
वीर भगत सिंह और उनके साथियों ने नेता लाला लाजपत राय का बदला लेने का है सोचा और जेम्स ए कोर्ट को मौत के घाट उतारने की साजिश रची जो लाहौर पुलिस के अध्यक्ष थे। भगत सिंह और उनके सहयोगी बने और पुलिस अध्यक्ष जे.पी. सौन्डर्स को मार डाला और भगत सिंह पुलिस के द्वारा गिरफ्तार ना हो पाई इसके लिए लाहौर को तुरंत छोड़ दिया और अपने साजिश में सफल रहे।
वीर भगत सिंह की फांसी की सजा
क्रांतिकारी वीर भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव और राजगुरु इन तीनों व्यक्तियों को 23 मार्च 1931 कि सुबह तकरीबन 7:30 के करीब फांसी की सजा दी गई थी और फांसी देते समय इन क्रांतिकारियों ने अपनी जुबान से इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाया था।
वीर भगत सिंह और उनके दो साथी फांसी की सजा के लिए उत्सुक थे और जब वीर भगत सिंह और उनके साथियों को जेल के अंदर कैद कर दिया गया था तब उन्होंने अन्न और जल का त्याग कर दिया था और जेल में बैठे बैठे भी अपना खोफ रखा हुआ था।
सतलाज नदी के किनारे हुसैनीवाला के अंदर वीर भगत सिंह और उनके साथियों को अंतिम संस्कार दिया गया और उन्हें सम्मानित किया गया। इसी तरीके से भगत सिंह का जीवन परिचय पूरी तरीके से क्रांतिकारी और राष्ट्र समर्पण को अर्पित करता हुआ था।
भगत सिंह अनमोल वचन (Bhagat Singh Quote )
- Bhagat Singh Quote 1
“वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन वे मेरे विचारों को नहीं मार सकते। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, लेकिन वे मेरी आत्मा को कुचलने में सफल नहीं होंगे”
- Bhagat Singh Quote 2
“क्रांति मानव जाति का एक अविभाज्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक अविनाशी जन्म अधिकार है”
- Bhagat Singh Quote 3
“मैं ऐसा पागल हूँ कि जेल में भी आज़ाद हूँ”
- Bhagat Singh Quote 4
“मैं महत्वाकांक्षा और आशा और जीवन के आकर्षण से भरा हूं। लेकिन जरूरत के समय मैं सब कुछ त्याग सकता हूं’
- Bhagat Singh Quote 5
“बहरो को सुनाना है तो आवाज बहुत तेज होनी चाहिए”
- Bhagat Singh Quote 6
“बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं होती। क्रांति की तलवार विचारों के पत्थर पर तेज होती है”
- Bhagat Singh Quote 7
“श्रम ही समाज का वास्तविक निर्वाहक है”
- Bhagat Singh Quote 8
“लोग चीजों के स्थापित क्रम के आदी हो जाते हैं और परिवर्तन के विचार से कांपते हैं। यह इस सुस्ती की भावना है जिसे क्रांतिकारी भावना द्वारा प्रतिस्थापित करने की आवश्यकता है”
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FAQ
Ans : Banga, Pakistan
Ans : सरदार किशन सिंह संधू
Ans : “मेरे खून का एक-एक कतरा कभी तो इंकलाब लाएगा।”
Ans : शादी लाल और शोभा सिंह
Ans : भगत सिंह ने जेल के दौरान एक डायरी लिखी थी।
Ans : उन्हें फांसी की सजा सुनाने वाला न्यायाधीश का नाम जी.सी. हिल्टन था ।
निष्कर्ष (Conclusion)
उम्मीद है की आपको शहीद भगत सिंह जी के बारे में सभी तरह की जानकारी मिल गयी और अगर आपको शहीद भगत सिंह जी के बारे में यह जानकारी पसंद आई तो अपने दोस्तों के साथ इस पोस्ट को शेयर करें और कोई सवाल है तो आप हमें निचे कमेंट सेक्शन में पूछ सकते है।