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सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते हैं – Types of Software in Hindi

सॉफ्टवेयर के प्रकार: आजकल का समय आईटी (इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी) का है और आने वाला समय आईटी का ही रहने वाला है। वैज्ञानिकों ने एक से बढ़कर एक खोज की है। कंप्यूटर और मोबाइल जैसे काफी डिवाइसों का आविष्कार किया है। लेकिन इन डिवाइसों को चलाने के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है। बिना सॉफ्टवेयर के आपन डिवाइसों का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते हैं

सॉफ्टवेयर एक तरह से प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के डाटा का एक समूह होता है। जो हमारे कंप्यूटर को इंटेलिजेंट बनाता है। इन सॉफ्टवेयर के बिना ना तो मोबाइल और कंप्यूटर चलते हैं और ना ही आप मोबाइल कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे की सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते हैं और वह कौन-कौन से हैं तो उसके लिए आपको यह पोस्ट पढ़ना जरूरी है। ताकि आपको इस आर्टिकल से सॉफ्टवेयर की नॉलेज मिल सके।

सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते हैं ?

सॉफ्टवेयर वैसे तो कई प्रकार के होते हैं। जिनका इस्तेमाल आप अपने मोबाइल और कंप्यूटर और ऐसे ही काफी डिवाइस में करते हैं। सॉफ्टवेयर को मुख्यतः तीन भागों में बांटा गया है। यह तीन प्रकार के सॉफ्टवेयर इस प्रकार के हैं। जिनकी लिस्ट हमने आपको नीचे दी है।

  • सिस्टम सॉफ्टवेयर
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर

सिस्टम सॉफ्टवेयर

सिस्टम सॉफ्टवेयर सभी सॉफ्टवेयर में सबसे मेन होते हैं। बिना सिस्टम सॉफ्टवेयर के किसी भी प्रकार के सॉफ्टवेयर को चलाना नामुमकिन होता है। चाहे वह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर हो या फिर यूटिलिटी सॉफ्टवेयर है। अगर किसी भी सॉफ्टवेयर को चलाना होता है तो उसमें सिस्टम सॉफ्टवेयर का अहम योगदान होता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर यूजर को सीधा हार्डवेयर और अन्य सॉफ्टवेयर से इंटरेक्ट करने की अनुमति देते हैं। सिस्टम सॉफ्टवेयर भी कई प्रकार के होते हैं। हम आपको आसान भाषा में समझाते हैं। जैसे कि मान लो एक घर होता है। घर बनाने से पहले उसकी नींव होती है। उसी प्रकार से सिस्टम सॉफ्टवेयर भी बाकी सॉफ्टवेयर के लिए एक तरीके से नीव मानी जाती है। बिना इसके आपका सिस्टम काम ही नहीं कर सकता है और उस पर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और यूटिलिटी सॉफ्टवेयर काम ही नहीं कर सकते हैं।

सिस्टम सॉफ्टवेयर के कुछ उदाहरण

बॉयोस

बॉयोस एक प्रकार का सिस्टम सॉफ्टवेयर होता है। जिसकी सहायता से आप अपने सिस्टम को ट्रबल सूट-बूट या फिर उसकी इंटरनल सेटिंग है। उसमें आप चेंज कर सकते हैं।

बूट प्रोग्राम

बूट प्रोग्राम एक तरह से आपके कंप्यूटर या मोबाइल जैसे सिस्टम को शुरू करने के लिए प्रक्रिया होती है। जिसे हार्डवेयर की सहायता से शुरू किया जाता है। जैसे कि कोई बटन प्रेस करके या फिर सॉफ्टवेयर कमांड के द्वारा।

डिवाइस ड्राइवर

जब भी आप किसी हार्डवेयर डिवाइस को किसी भी सिस्टम के साथ कनेक्ट करते हैं तो वह आपके सिस्टम के साथ कनेक्ट नहीं कर पाता है। कनेक्ट करने के लिए डिवाइस ड्राइवर की जरूरत पड़ती है। जिससे वह आपके सिस्टम के सॉफ्टवेयर से हार्डवेयर डिवाइस को इंटरेक्ट कर सकता है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

वह सॉफ्टवेयर जिनकी सहायता से आप अपने कंप्यूटर या फिर मोबाइल जैसे डिवाइस पर कोई भी काम करते हैं। जैसे कि आप टेक्स्ट लिखना गेम खेलना ब्राउज करना या फिर अन्य प्रकार के कार्य अपने सिस्टम पर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के द्वारा ही कर सकते हैं।

जो यह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होते है, यह काफी प्रकार के हो सकते हैं। जैसे की आपके कंप्यूटर में जो एमएस वर्ड, क्रोम ब्राउज,र वीएलसी मीडिया प्लेयर, और मोबाइल में गेम्स, ओपेरा मिनी, फेसबुक, ऐसे सॉफ्टवेयर जो आपके कार्य करने में काम आते हैं। यह आपको यूजर ओरिएंटेड कार्य करने की अनुमति देते हैं।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के कुछ उदाहरण

वेब ब्राउज़र

वेब ब्राउज़र एक तरीके से एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होते हैं जो आपके कार्य करने के काम आते हैं। अगर आपको इंटरनेट का इस्तेमाल करना है और इंटरनेट पर कुछ भी खोजना होता है तो वह वेब ब्राउज़र के जरिए हो सकता है। उदाहरण के लिए क्रोम, फायरफॉक्स, ओपेरा मिनी, इत्यादि।

एडिटिंग सॉफ्टवेयर

एडिटिंग सॉफ्टवेयर के बारे में तो आप सभी जानते ही है। जिनकी सहायता से आप वीडियो एडिटिंग, ऑडियो एडिटिंग, या फिर किसी भी प्रकार की एडिटिंग करते सकते हैं। यह भी एक तरीके से एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का ही भाग है।

ऑफिस सॉफ्टवेयर

आप अपने ऑफिशियल वर्क के लिए जिम सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। जैसे माइक्रोसॉफ्ट वर्ड माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल माइक्रोसॉफ्ट पावरप्वाइंट यह सारे सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर ही होते हैं।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर

आपके सिस्टम को मैनेज करने या फिर आपके सिस्टम में आने वाली प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए यूटिलिटी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है। एक तरीके से आप इसे अपने सिस्टम का टूलबॉक्स भी समझ सकते हैं। अगर आपके सिस्टम में सॉफ्टवेयर लेवल की प्रॉब्लम होती है तो यह उसके सॉल्यूशन के काम आता है।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर आपके सिस्टम की सॉफ्टवेयर लेवल की प्रॉब्लम का सलूशन होता है। इसका एक उदाहरण यह है। जैसे कि अगर आपके कंप्यूटर में वायरस आने की संभावना होती है या फिर फाइल करप्ट होने की संभावना होती है। उसके लिए यह सलूशन है।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के कुछ उदाहरण

एंटीवायरस

आपके सिस्टम में आने वाले वायरस को यह रोकता है। अगर आपके सिस्टम में वायरस आ भी जाता है तो उसे यह निकालने में मदद करता है। जिसके द्वारे आपके सिस्टम को बचाने में मदद मिलती है। यह आपके कंप्यूटर या मोबाइल दोनों में डाउनलोड हो जाता है।

बैकअप यूटिलिटी

बैकअप यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के द्वारा आप अपने जरूरी फाइलों का बैकअप करके रख सकते हैं। अगर किसी भी वजह से आपकी जरूरी फाइल्स आपके सिस्टम से डिलीट हो जाती है तो इन यूटिलिटी सॉफ्टवेयर की सहायता से आप उन्हें द्वारा अपने सिस्टम में रिकवर कर सकते हैं।

डिस्क मैनेजमेंट

डिस्क मैनेजमेंट का काम आपके सिस्टम के ड्राइवर को पार्टीशन में सिंक करने के काम आता है। मतलब की आप अपने सिस्टम में उपस्थित जानकारियों को सुरक्षित रख सकते हैं और एक जगह व्यवस्थित करके रख सकते हैं।

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FAQ

Q : सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते हैं?

Ans : सॉफ्टवेयर के तीन मुख्य प्रकार होते है।

Q : सॉफ्टवेयर कैसे तैयार किया जाता है?

Ans : सॉफ्टवेयर बनाने के लिए कोडिंग की जरूरत होती है चाहे वह android सॉफ्टवेयर हो या desktop सॉफ्टवेयर हो, और यह कोड बाइनरी लैंग्वेज(binary language) में लिखा होता है, बाइनरी लैंग्वेज ‘0,1’ को ही कहा जाता है। इसको लिखने के लिए Java, C, C++,vb.net,asp.net,आदि की जरूरत होती है।

Q : ऑपरेटिंग सिस्टम का उदाहरण क्या है?

Ans : Linux, Unix, Windows 2000, Ubuntu, Mac OS आदि Multi-user Operating System के उदाहरण हैं।

निष्कर्ष

आज हमने आपको इस आर्टिकल में सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते हैं। इसकी जानकारी आसान शब्दों में दी है। अब आप भी समझ गए होंगे कि आपके डिवाइस में इस्तेमाल किया गया सॉफ्टवेयर कौन सा है। अगर आप ऐसे ही इनफॉर्मेटिव पोस्ट पाना चाहते हैं। आप हमारे ब्लॉग को फॉलो कर सकते हैं। अगर आप हमें अपना कोई सुझाव देना चाहते हैं या फिर हमसे कुछ जानना चाहते हैं। आप हमें कमेंट कर सकते हैं।

Naresh Kumar
Naresh Kumarhttps://howgyan.com
इनका नाम नरेश कुमार है और यह इस ब्लॉग के Founder है । वोह एक Professional Blogger हैं जो SEO, Technology, Internet से जुड़ी विषय में रुचि रखते है । इनको 2 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 4 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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