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Kavi Kalidas Kiske Rajkavi The | कवी कालिदास किसके राजकवि थे ?

हेल्लो दोस्तों आज हम एक महान साहित्यकार, नाटककार और कवि कालिदास जी के बारे में बात करने वाले हिया की Kavi Kalidas Kiske Rajkavi The (कवी कालिदास किसके राजकवि थे) तो आपको इस आर्टिकल से पता चल जायगा की कवि कालिदास किसके राज्यकवि थे ।

कालिदास संस्कृत भाषा के महान कवि और नाटककार थे । उन्होंने भारत की पौराणिक कथाओं और दर्शन को आधार बनाकर रचनाएँ की और उनकी रचनाओं में भारतीय जीवन और दर्शन के विविध रूप और मूल तत्त्व निरूपित हैं ।

कालिदास अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण राष्ट्र की समग्र राष्ट्रीय चेतना को स्वर देने वाले कवि माने जाते हैं और कुछ विद्वान उन्हें राष्ट्रीय कवि का स्थान तक देते हैं ।

कवी कालिदास किसके राजकवि थे
महान साहित्यकार,नाटककार और कवि कालिदास

अभिज्ञानशाकुंतलम् कालिदास की सबसे प्रसिद्ध रचना है। यह नाटक कुछ उन भारतीय साहित्यिक कृतियों में से है जिनका सबसे पहले यूरोपीय भाषाओं में अनुवाद हुआ था ।

यह पूरे विश्व साहित्य में अग्रगण्य रचना मानी जाती है । मेघदूतम् कालिदास की सर्वश्रेष्ठ रचना है जिसमें कवि की कल्पनाशक्ति और अभिव्यंजनावाद भावाभिव्यन्जना शक्ति अपने सर्वोत्कृष्ट स्तर पर है और प्रकृति के मानवीकरण का अद्भुत रखंडकाव्ये से खंडकाव्य में दिखता है ।

Kavi Kalidas Kiske Rajkavi The – कवी कालिदास किसके राजकवि थे ?

कवी कालिदास चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के दौरान के राज्य कवि थे उनके शासन में ही राजकवि बने थे और उनको भारत के सबसे महान और प्रसिद्ध संस्कृत कवि कहा जाता है । कवि कालिदास ने लिखी हुई बहुत सारी नाटक और कविताएं उस दौरान बहुत प्रसिद्ध थी ।

Kavi Kalidas Kiske Rajkavi The

कवी कालिदास का जन्म स्थान

कालिदास के जन्मस्थान के बारे में भी विवाद है । मेघदूतम् में उज्जैन के प्रति उनकी विशेष प्रेम को देखते हुए कुछ लोग उन्हें उज्जैन का निवासी मानते हैं ।

साहित्यकारों ने ये भी सिद्ध करने का प्रयास किया है कि कालिदास का जन्म उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले के कविल्ठा गांव में हुआ था । कालिदास ने यहीं अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी औऱ यहीं पर उन्होंने मेघदूत, कुमारसंभव औऱ रघुवंश जैसे महाकाव्यों की रचना की थी ।

कविल्ठा चारधाम यात्रा मार्ग में गुप्तकाशी में स्थित है । गुप्तकाशी से कालीमठ सिद्धपीठ वाले रास्ते में कालीमठ मंदिर से चार किलोमीटर आगे कविल्ठा गांव स्थित है । कविल्ठा में सरकार ने कालिदास की प्रतिमा स्थापित कर एक सभागार का भी निर्माण करवाया है जहां पर हर साल जून माह में तीन दिनों तक गोष्ठी का आयोजन होता है, जिसमें देशभर के विद्वान भाग लेते हैं ।

कालिदास के प्रवास के कुछ साक्ष्य बिहार के मधुबनी जिला के उच्चैठ में भी मिलते हैं । कहा जाता है विद्योतमा (कालिदास की पत्नी) से शास्त्रार्थ में पराजय के बाद कालिदास यहीं गुरुकुल में रुके ।

कालिदास को यहीं उच्चैठ भगवती से ज्ञान का वरदान मिला । यहां आज भी कालिदास का डीह है । यहाँ की मिट्टी से बच्चों के प्रथम अक्षर लिखने की परंपरा आज भी यहाँ प्रचलित है ।

कुछ विद्वानों ने तो उन्हें बंगाल और उड़ीसा का भी सिद्ध करने का प्रयत्न किया है । कहते हैं कि कालिदास की श्रीलंका में हत्या कर दी गई थी लेकिन विद्वान इसे भी कपोल-कल्पित मानते हैं ।

कवि कालिदास की रचनाए

कालिदास की रचनाओ का वर्णन निम्न अनुसार हैं :-

  • नाटक – मालविकाग्निमित्रम्, अभिज्ञान शाकुन्तलम्, विक्रमोर्वशीयम् इत्यादि ।
  • महाकाव्य – कुमारसंभवम् , रघुवंशम् इत्यादि ।
  • खंडकाव्य – मेघदूतम् , ऋतुसंहारम् इत्यादि ।

कवी कालिदास का जीवन

कथाओं और किंवदंतियों के अनुसार कालिदास शारीरिक रूप से बहुत सुंदर थे और विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों में एक थे । कहा जाता है कि प्रारंभिक जीवन में कालिदास अनपढ़ और मूर्ख थे ।

कालिदास का विवाह विद्योत्तमा नाम की राजकुमारी से हुआ। ऐसा कहा जाता है कि विद्योत्तमा ने प्रतिज्ञा की थी कि जो कोई उसे शास्त्रार्थ में हरा देगा, वह उसी के साथ विवाह करेगी ।

जब विद्योत्तमा ने शास्त्रार्थ में सभी विद्वानों को हरा दिया तो हार को अपमान समझकर कुछ विद्वानों ने बदला लेने के लिए विद्योत्तमा का विवाह महामूर्ख व्यक्ति के साथ कराने का निश्चय किया ।

चलते चलते उन्हें एक वृक्ष दिखाई दिया जहां पर एक व्यक्ति जिस डाल पर बैठा था, उसी को काट रहा था। उन्होंने सोचा कि इससे बड़ा मूर्ख तो कोई मिलेगा ही नहीं । उन्होंने उसे राजकुमारी से विवाह का प्रलोभन देकर नीचे उतारा और कहा- “मौन धारण कर लो और जो हम कहेंगे बस वही करना” ।

उन लोगों ने स्वांग भेष बना कर विद्योत्तमा के सामने प्रस्तुत किया कि हमारे गुरु आप से शास्त्रार्थ करने के लिए आए है, परंतु अभी मौनव्रती हैं, इसलिए ये हाथों के संकेत से उत्तर देंगे ।

इनके संकेतों को समझ कर हम वाणी में आपको उसका उत्तर देंगे । शास्त्रार्थ प्रारंभ हुआ । विद्योत्तमा मौन शब्दावली में गूढ़ प्रश्न पूछती थी, जिसे कालिदास अपनी बुद्धि से मौन संकेतों से ही जवाब दे देते थे ।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q : कवी गुरु कालिदास जी किस राजा के दरबार मे राजकवी थे ?

Ans : कालिदास जी विक्रमादित्य राजा के दरबार मे राजकवी थे ।

Q : कवी कालिदास जी के पत्नी का नाम क्या था ?

Ans : विद्योत्तमा ।

Q : कवी कालिदास जी के साहित्य रचना की विशेषताए क्या थी ?

Ans : मधुर भाषा, अलंकारिक वर्णन, सरलता एवं शृंगार रस ।

Q : कवी कालिदास जी का मृत्यू कब हुआ था ?

Ans : कालिदास जी के मृत्यू की तारीख का कोई विश्वासलायक प्रमाण मौजूद नही है ।

Kavi Kalidas Kiske Rajkavi The | कवी कालिदास किसके राजकवि थे – [Video]

निष्कर्ष

उम्मीद है की आपको Kavi Kalidas Kiske Rajkavi The और उनके जीवन के बारे में जानकारी मिल गयी होगी और अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करे ।

Naresh Kumar
Naresh Kumarhttps://howgyan.com
इनका नाम नरेश कुमार है और यह इस ब्लॉग के Founder है । वोह एक Professional Blogger हैं जो SEO, Technology, Internet से जुड़ी विषय में रुचि रखते है । इनको 2 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 4 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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